शहर को शहरी मुखौटा मिले तो कैसे
जब भू-माफियाओं ने ही मनमाने ढंग से नई बस्ती बसाने का जिम्मा ले लिया है। बिना ले
आउट के प्लाटिंग का काम शहर के बीस से अधिक स्थानों में चल रहा है ।
नई बस्तियों में न तो विद्युत
खंभे लगे है और न ही पार्क के लिए कोई जगह छोड़ी जा रही है। ड्रेनेज की व्यवस्था न होने
से इन क्षेत्रों में गंदा पानी का भराव बीमारियां बांट रहा है।
पिछले दस साल में शहर का क्षेत्रफल
बढ़कर दुगना हो गया है। तेजी के साथ शहर का विस्तार होता जा रहा है। विनियमित क्षेत्र
के मानकों की अनदेखी होने से शहर का नया क्षेत्र गांवों से भी अधिक बदतर है। शहर के
शांतीनगर, नउवाबाग, दुर्गा मंदिर, मंडी समिति, बड़नपुर आदि क्षेत्रों में किसानों की
भूमि सस्ते दाम पर खरीद कर भू-माफिया बिना सुविधा दिए मनमाने दाम में प्लाट बेंच रहे
है। शहर से दस किलोमीटर के दायरे की कृषि जमीन पर भू-माफियाओं की नजर टिकी हुई है।
भू-माफियाओं के हौसले इतने अधिक
बढ़ गए है कि कोई अपने को सुरक्षित नहीं समझ रहा है। गढ़ीवा क्षेत्र के तीन किसानों
की जमीन तो एक भू-माफिया ने फर्जी बैनामा करा लिया। किसान तो तब पता चला जब वह ऋण लेने
के लिए जमीन के खतौनी निकाली तो दूसरे का नाम मिला।
क्या इसे विकास कहते हैं ? अपने जवाब जरूर दे -
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