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Saturday, December 28, 2013

सपा सरकार का नारा कुछ भी कर लो जतन काम नहीं करेंगे हम

कार्यो में पारदर्शिता आए तो कैसे जब विभागीय अधिकारी ही जनसूचना का अधिकार (आरटीआई) की धार को कुंद किए हैं। आवेदकों को समय से जानकारी ही नहीं देते हैं। महीनों आवेदक विभाग के चक्कर लगाते रहते हैं। इसके बाद भी उन्हें कामयाबी नहीं मिलती। अंत में वे निराश होकर अपने लोग घर बैठ जाते हैं। स्थिति यह है कि विभागों में 6500 से अधिक आवेदन डंप हैं और उन्हें सूचनाएं नहीं मिलती। देखो अब नूतन वर्ष 2014 में विभागीय अधिकारियों का मामले पर क्या रुख होगा।

जनसूचना अधिकार अधिनियम वर्ष 2005 को लागू हुआ था। जिसमें विभागाध्यक्षों को आवेदकों को मांगी गई सूचनाएं 90 दिन के अंदर देने की निर्देश दिए गए थे। लेकिन अधिकारी विभाग की पोल न खुले, कही कार्रवाई की चपेट में न आ जाए। इसलिए आवेदकों को सूचनाएं ही नहीं देते। सबसे अधिक सूचनाएं विकास खंडों, पुलिस, समाज कल्याण, नगर पालिका, विद्युत, सिंचाई एवं जिला पंचायत कार्यालय हैं।

देखिये कितनी कहां शिकायतें - 
  1. विकास खंड कार्यालय में - 1800
  2. पुलिस विभाग - 400
  3. समाज कल्याण -250
  4. सिंचाई विभाग -400
  5. विद्युत -680
  6. नगर पालिका एवं पंचायत -500
  7. जिला पंचायत - 230
  8. विकास भवन के कार्यालयों में - 700
  9. आबकारी विभाग - 200
  10. अन्य कार्यालयों मे - 1700


क्या आपकी भी कोई शिकायत अनसुनी रह गई ? नीचे कमेंट अवश्य करे - 

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