फतेहपुर। दस दिन पहले मुख्यमंत्री
अखिलेश यादव जब शहर निरीक्षण करने आए थे, तो उनके सामने समस्या
उठाई गई थी कि महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन का कोई उपयोग नहीं है।
उन्होंने डीएम को निर्देश देने के साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं पर सख्त रवैया अपनाने
के निर्देश दिए थे लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं है। जिला महिला अस्पताल में
अल्ट्रासाउंड मशीन पिछले करीब एक दशक से ताले में कैद है।
जब से मशीनें आई हैं,
तब से नहीं चलीं। वजह है कि यहां पर रेडियोलॉजिस्ट की
नियुक्ति ही नहीं हुई। मजबूरन गरीब मरीजों को बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता
है। स्टाफ और संसाधन के अभाव से जूझते जिला महिला अस्पताल में की अल्ट्रासाउंड
सेवा का अता पता नही है। क्योंकि अस्पताल में जब से मशीन आई तब से इस सेवा को
संचालित करने के लिए शासन स्तर से रेडियोलाजिस्ट की नियुक्ति नहीं हो सकी है। ओपीडी
के रूम नंबर 14 में अल्ट्रासाउंड कक्ष
होने के संकेत तो अस्पताल में बने रहते हैं लेकिन जब वहां मरीज जाते हैं तो सिर्फ
मायूसी हाथ आती है। वजह है कि वहां का ताला कभी
खुलता ही नहीं है। मरीज निराश होकर निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर जाने को मजबूर हैं। हर
रोज करीब दो दर्जन महिला रोगियों को अल्ट्रासाउंड के लिए बाहर भेजा जा रहा है।
गुरुवार को बकंधा गांव की रानी पेट की समस्या लेकर अस्पताल आई थीं। डाक्टरों ने
अल्ट्रासाउंड कराने को कहा गया था।
क्या कहते हैं जिम्मेदार -
कई बार रेडियोलाजिस्ट पद के लिए महकमे को अवगत कराया है। बुधवार को निरीक्षण
में आए सचिव शहरी आवास से भी रेडियोलाजिस्ट की कमी बताई ताकि शासन तक उनकी बात
पहुंच सके। सचिव ने आश्वासन दिया है। - डा. रेखारानी,
सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
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