दो साल में 5 किमी बाईपास निर्माण का काम कार्यदायी संस्था नहीं पूरा कर पाई है। अत्यंत धीमी गति से चल रहा काम लगता है इस साल भी पूरा नहीं हो पाएगा। हैरानी कि है कि बिंदकी में 5 किमी बाईपास का निर्माण वर्ष 2011 में 8 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुआ था जिसको अब तीन साल पुरे हो जाएंगे, संस्था के अधिकारियों के आलस्य की सीमा तो यह है कि अब तक किसानों को कोई नोटिस तक जारी नहीं हुआ है
और सबसे मुख्य बात यह है की हमारी राज्य सरकार उर्फ़ अखिलेश सरकार ने इस कार्य के लिए इन तीन सालो के बीच में इसकी सुध लेना भी जरुरी नहीं समझा क्यूंकि अब तक 8 करोड़ में से दो करोड़ धनराशि भी अभी सरकार से नहीं मिली है I
मगर सच कहूं मित्रो यदि यह बाईपास निर्माण हो जाए तो बिंदकी के अंदर जाम की समस्या का भी हल हो जाय परन्तु ऐसा लगता है कि अखिलेश जी गहरी नींद में है जो खुलने का नाम नहीं ले रही है, और कोई जगा भी नहीं पा रहा है क्यूंकि यह नींद सत्ता के नशे में चूर होकर जो आयी है I
जहा एक तरफ विकास के नाम पर केवल लैपटॉप बांटे जाते हैं तो वही दूसरी और असल समस्याओ पर राज्य शासित सरकार द्वारा कोई कदम ही नहीं उठाये जाते है या यूँ कहे अनसुनी कर दी जाती है, नहीं तो यह काम इतना लम्बा खिचना चाहिए था क्या ?
क्यों अब उचित राशि तक नहीं आयी है राज्य सरकार से ?
क्यों हर निर्माण कार्य जो जनता के लिए हो यूँही लम्बे खिंचते चले जाते हैं ?
उम्मीद है आप सभी मित्र अपना मत रख्नेगे इस बात पर -
और सबसे मुख्य बात यह है की हमारी राज्य सरकार उर्फ़ अखिलेश सरकार ने इस कार्य के लिए इन तीन सालो के बीच में इसकी सुध लेना भी जरुरी नहीं समझा क्यूंकि अब तक 8 करोड़ में से दो करोड़ धनराशि भी अभी सरकार से नहीं मिली है I
मगर सच कहूं मित्रो यदि यह बाईपास निर्माण हो जाए तो बिंदकी के अंदर जाम की समस्या का भी हल हो जाय परन्तु ऐसा लगता है कि अखिलेश जी गहरी नींद में है जो खुलने का नाम नहीं ले रही है, और कोई जगा भी नहीं पा रहा है क्यूंकि यह नींद सत्ता के नशे में चूर होकर जो आयी है I
जहा एक तरफ विकास के नाम पर केवल लैपटॉप बांटे जाते हैं तो वही दूसरी और असल समस्याओ पर राज्य शासित सरकार द्वारा कोई कदम ही नहीं उठाये जाते है या यूँ कहे अनसुनी कर दी जाती है, नहीं तो यह काम इतना लम्बा खिचना चाहिए था क्या ?
क्यों अब उचित राशि तक नहीं आयी है राज्य सरकार से ?
क्यों हर निर्माण कार्य जो जनता के लिए हो यूँही लम्बे खिंचते चले जाते हैं ?
उम्मीद है आप सभी मित्र अपना मत रख्नेगे इस बात पर -
- विक्रम सिंह
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