फतेहपुर से : रबी की फसलों में टेल तक पानी पहुंचाने के लिए सिंचाई विभाग
ने 2000 क्यूसेक पानी की डिमांड की थी। जिसमें मंगलवार
को 400 क्यूसेक पानी ही छोड़ा गया था।
किसान नहरों में पानी छोड़े जाने के लिए एक माह से आवाज बुलंद कर रहे थे। कई
बार कलेक्ट्रेट में आकर धरना प्रदर्शन भी किया था। पानी न आने से किसान आंदोलन की राह
में उतरने की तैयारी बना रहे थे। इसकी भनक पाते ही सोमवार को देररात राम गंगा
केनाल के रजबहा एवं माइनरों में पानी छोड़ दिया गया। लेकिन पानी बहुत कम आया है।
इससे किसान आंदोलित हैं। किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से पानी और छोड़े जाने की मांग की है। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र पानी और नहीं छोड़ा गया तो आंदोलन छेड़ा जाएगा। बताते चलें कि निचली एवं रामगंगा केनाल में कुल 280 रजबहा एवं माइनर हैं।
इससे किसान आंदोलित हैं। किसानों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों से पानी और छोड़े जाने की मांग की है। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र पानी और नहीं छोड़ा गया तो आंदोलन छेड़ा जाएगा। बताते चलें कि निचली एवं रामगंगा केनाल में कुल 280 रजबहा एवं माइनर हैं।
मामले पर एक्सईएन कप्तान सिंह का कहना था कि रामगंगा केनाल की नहरों में पानी
छोड़ दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही पानी और छोड़ा जाएगा।
क्या कहते हैं किसान
- धाता के किसान रमेश कुमार, हथगाम के सूरजदीन, महेश कुमार, गाजीपुर के उदयभान सिंह,
हसवा के मो. सलीम, अहमद हुसेन आदि का
कहना था कि –
जिले के साथ पानी छोड़ने में सौतेला व्यवहार किया जाता है। आरोप लगाया कि यहां
का पानी अन्य जिलों की नहरों भेज दिया जाता है।
पांच वर्ष से पानी का संकट
- जिले में पानी का संकट पिछले पांच वर्ष से अधिक गहराया हुआ
है। नहरों को आवंटित पानी कभी नहीं मिला। इससे हर वर्ष में फसले सूख जाती है। गत
वर्ष खरीफ की 30 हेक्टेयर फसलें पानी के
अभाव में सूख गई थी।
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