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Wednesday, December 4, 2013

370 पर गरमाई सियासी ‘बहस’, RSS मोदी के साथ

नरेंद्र मोदी दस बार देश के प्रधानमंत्री बन जाएं तो भी वह अनुच्छेद 370 नहीं हटा पाएंगे। ये जवाब है जम्मून-कश्मीर के पूर्व मुख्य मंत्री फारूख अब्दुाल्लाी का जो उन्होंने अनुच्छेोद 370 पर नरेंद्र मोदी के बयान पर दिया है। उधर, आरएसएस ने मोदी के बयान का पक्ष लेते हुए कहा है कि 370 का समर्थन करने वाले बहस से भाग रहे हैं। इस बीच मोदी को इस मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर का साथ मिला है। कश्मीर की रहने वालीं सुनंदा पुष्कर ने कहा है कि बाहर के शख्स से शादी करने पर राज्य में महिलाओं के साथ भेदभाव होता है।
फारुख अब्दुल्ला ने कहा कि नरेंद्र मोदी 10 बार भी देश के प्रधानमंत्री बन जाएं तो भी वे संविधान से अनुच्छेद 370 नहीं हटा पाएंगे। आप इस पर बहस की बात कर रहे हैं जबकि बीजेपी कोई चर्चा ही नहीं करना चाहती। उधर, इस मुद्दे पर अब तक खामोश आरएसएस ने मोदी के बयान का समर्थन किया है। साथ ही, बीजेपी भी मोदी के बचाव में खड़ी हो गई है।

आरएसएस प्रवक्ता राम माधव ने कहा कि संघ हमेशा कहता आया है धारा 370 भावनात्मक विलय में बहुत बड़ी बाधा है। जम्मू के हिंदू, बौद्ध, अल्पसंख्यकों और महिलाओं के साथ इस धारा के कारण भेदभाव होता है। हम कहते हैं इसे हटना चाहिए, लेकिन जो लोग कहते हैं कि इसे रहना चाहिए वो बहस से भाग रहे हैं। बहस तो हमेशा से होती रही है, हमेशा से हम ही तो इसे उठाते रहे हैं।  बीजेपी प्रवक्ता निर्मला सीतारमण ने संवाददाताओं से कहा कि उमर कहते हैं कि नरेंद्र मोदी ने जम्मू की रैली में अनुच्छेद 370 पर लोगों को भ्रमित किया है, जबकि यह स्पष्ट है कि अनुच्छेद 370 के नाम पर राज्य का एक विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग इसका दुरुपयोग कर रहा है।
इस बीच नरेंद्र मोदी को अपने विवादित बयान पर ऐसे शख्स का साथ मिला है जिसकी उम्मीद उन्हें कतई नहीं रही होगी। वे हैं केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी और मूल रूप से कश्मीर की रहने वालीं सुनंदा पुष्कर। सुनंदा को 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड कहकर मोदी एक बार विवाद खड़ा कर चुके हैं। लेकिन सुनंदा ने राज्य में महिलाओं के साथ भेदभाव वाले मोदी के बयान का समर्थन किया है।
सुनंदा पुष्कर ने कहा कि इसपर पुनर्विचार की जरूरत है। महिलाओं के साथ इसके चलते काफी भेदभाव होता है। कश्मीर की मेरी दोस्त बताती हैं कि अगर वे किसी गैर कश्मीरी से शादी कर लें तो उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।

साफ है कि मोदी ने पानी में पत्थर उछाल कर बहस छेड़ने का जो काम किया था उसका पूरा असर हो रहा है। लेकिन सवाल तो ये है कि अनुच्छेद 370 का विरोध तो जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष श्यामा प्रसाद मुखर्जी के वक्त से रहा है। ऐसे में बहस का न्यौता क्या अब तक की नीति में बदलाव का संकेत है। सवाल ये भी है कि छह साल तक केंद्र में सत्ता में रही बीजेपी इस मुद्दे पर खामोश क्यों रही।
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विक्रम सिंह. (मुझसे जुड़े मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/vikramsinghbjp पर 

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