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Friday, December 13, 2013

प्रधानमंत्री को दोस्त की सलाह मोनू! छोड़ दो कुर्सी, अब भक्ति करो


अमृतसर के हिंदू सभा कालेज में 1951 से 1954 तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सहपाठी रहे पठानकोट के विक्रम सिंह ने यह सलाह प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दी है। विक्रम सिंह मनमोहन सिंह की जवानी के कई राज से भी वाकिफ हैं। एक ही क्लास में अगल-बगल बैठने वाले विक्रम सिंह कहते हैं कि 'वैसे मोनू (प्यार से दोस्त उन्हें इसी नाम से पुकारा करते थे) गंभीर रहा करता था, लेकिन जब भी मौका मिलता तो शरारतें भी खूब करता था। उसकी अंग्रेजी काफी अच्छी थी, जिससे वह अंग्रेजी के प्रोफेसर का चहेता था।
पहली बार जब कालेज में इलेक्शन हुए तो मोनू ने प्रधान पद के लिए खड़े हमारे उम्मीदवार की जीत के लिए काफी जोरदार प्लानिंग की थी। इससे वह जीत भी गया। ठीक से नाम याद नहीं आ रहा है, शायद मिस्टर कपूर जीते थे। मोनू इससे कपूर का खास बन गया'
कुछ याद कर विक्रम सिंह हंसते हैं और कहते हैं,

'देखिये मोनू की किस्मत। बिना चुनाव लड़े दस साल प्रधानमंत्री रहे। अब तीसरे का चांस मुश्किल है, इसलिए मैं चाहता हूं कि मोनू राजनीति से संन्यास लेकर भक्ति करे। अब उम्र भी हो चली है।
सारी उम्र उन्होंने किताबें व फाइलें पढ़ने में ही गुजार दी।'

विक्रम सिंह कहते हैं कि डा. मनमोहन सिंह, प्रीतपाल सिंह, डीके शर्मा व वह स्वयं चारो दोस्त थे। चारों की खूब पटती थी। मोनू हर राज उसे बताता था। आज हमारे दो दोस्त प्रीतपाल व डीके शर्मा नहीं हैं।
आखिर में विक्रम सिंह कहते हैं कि -

विधानसभा चुनावो में कांग्रेस की करारी हार के अब वह पीएम के लिए नया चेहरा उतारने की बात करने लगी है, लेकिन मोनू की तरह कांग्रेस के पास कोई चेहरा नहीं है।
 मैं दोस्त के नाते नहीं, बल्कि एक देशवासी के नाते कह रहा हूं कि मोनू!

अब पीएम की कुर्सी छोड़ दो, उम्र अब भक्ति करने की है।'



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