राहुल
गाधी की आइएसआइ
संबंधी टिप्पणी पर विरोधी
चौतरफा हमला कर
रहे हैं। किस
हैसियत से राहुल
गाधी को इंटेलिजेंस
के अफसर ब्रीफ
कर रहे हैं
और कैसे गोपनीय
जानकारी वह मंच
से राजनीतिक विरोधियों
पर हमले के
लिए इस्तेमाल कर
रहे हैं। मामला
राहुल गाधी से
जुड़ा होने के
कारण काग्रेसी खुलकर
प्रतिक्रिया देने से
बच रहे हैं
लेकिन उन्हें निराशा
हुई है।
पाकिस्तानी
खुफिया एजेंसी का हवाला
देकर राहुल गाधी
प्रदेश के प्रभारी
रह चुके काग्रेस
के राष्ट्रीय महासचिव
दिग्विजय सिंह की
उस पालिटिकल लाइन
को आगे बढ़ाना
चाहते थे जो
बीते विधान सभा
चुनाव के लिए
अपनायी गई थी
और जिसके जरिए
स्थापित करने की
कोशिश की गई
कि दंगों की
प्रतिक्रिया के तौर
पर आतंकवाद पनपता
है। आने वाले
लोकसभा चुनाव में क्या
होगा यह अभी
निश्चित नहीं है
लेकिन इस रणनीति
का जो निराशाजनक
नतीजा गुजरे विधान
सभा चुनाव में
सामने आया उसको
देखते हुए काग्रेसी
आशंकित अवश्य हैं।
प्रदेश
काग्रेस के पदाधिकारी
रह चुके एक
नेता ने कहा
कि अच्छा होता
अगर इंटेलिजेंस के
अफसर के बजाय
जानकारी का माध्यम
पार्टी अथवा अन्य
सूत्रों को बताया
गया होता। साथ
ही दुश्मन मुल्क
की खुफिया एजेंसी
को चेतावनी भी
दे दी होती
तो बात बन
गई होती। पार्टी
नेताओं की निगाहें
अब 30 को हमीरपुर
के राठ में
होने वाली रैली
पर लगी है,
जहा उन्हें राहुल
गांधी से सधे
और सटीक जवाब
देने की उम्मीद
है।
सौजन्य
से : दैनिक जागरण
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