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Monday, October 28, 2013

और वो बोले- मोदी हैं, तो जिंदा हूं

झांसी, जागरण संवाददाता। 'मोदी हैं, तो जिंदा हूं' यह सुनते ही चेहरे पर उभरे प्रश्न भाव को देख कहा- यकीन मानो, ऐसा ही है। 'पत्रकार हैं, तो सुनिए' कहते हुए जगमोहन तिवारी ने खुद ही बताना शुरू किया। उनके अनुसार कुछ वर्ष पहले ट्रेन दुर्घटना में एक पैर, हाथों की अंगुलियां गंवा दीं। पत्‍‌नी अंधी है। दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद जान तो बच गई, लेकिन जिंदगी घिसट रही है। ट्राइ साइकिल से अफसरों और नेताओं के दफ्तरों के जाने कितने चक्कर लगाए, लेकिन आज तक तो वृद्धावस्था पेंशन मिली और ही विकलांग पेंशन। महोबा जिले के ग्राम सूपा निवासी जगमोहन के मुताबिक, व्यवस्था से और खुद की स्थिति से त्रस्त होकर उन्होंने आत्महत्या का फैसला कर लिया था, लेकिन जब सुना कि नरेंद्र मोदी झांसी रहे हैं, तो इरादा बदल दिया। मोदी से प्रभावित जगमोहन कहता हैं, उम्मीद है मोदी उनकी समस्याओं को व्यक्तिगत तौर पर सुनेंगे और कुछ करेंगे।


मोदी के लिए ट्राइ साइकिल से चला 200 किलोमीटर : जगमोहन ने महोबा से झांसी तक का सफर ट्राइ साइकिल से तय किया। यह दूरी 200 किलोमीटर है। एक दिन पहले यानि गुरुवार को झांसी पहुंचे। 

सौजन्य से : दैनिक जागरण 

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