नई दिल्ली।
नरेंद्र मोदी के
आक्रामक अंदाज के बरक्स
राहुल जनता की
भावनाओं को भुनाने
की कोशिश में
हैं। पांच राज्यों
के विधानसभा चुनाव
में जनता से
जुड़ने के लिए
वो भावनाओं का
सहारा ले रहे
हैं। राजस्थान के
दौरे पर गए
राहुल ने आज
अपनी दादी और
अपने पिता को
याद करते हुए
यहां तक कहा
कि, उन्होने मेरी
दादी को मारा,
मेरे पापा को
मारा और शायद
मुझे भी मार
डालें लेकिन मुझे
इससे फर्क नहीं
पड़ता। मध्य प्रदेश
के भाषण में
भी राहुल ने
अपनी मां सोनिया
की बीमारी का
जिक्र किया था।
सवाल है कि
क्या अपने जज्बाती
अंदाज से राहुल
जनता का दिल
जीतने में कामयाब
होंगे।
इससे
पहले मध्य प्रदेश
के शहडोल की
जनसभा में राहुल
ने सोनिया गांधी
की बीमारी का
जिक्र करते हुए
कहा था कि
बीमारी के बाद
भी संसद में
वोटिंग के लिए
रुकी रहीं। राहुल
ने बीजेपी को
निशाना बनाते हुए ये
भी कहा कि
बीजेपी लोगों की आपस
में लड़ाई कराती
है इसलिए मैं
इसके खिलाफ हूं।
जाहिर है बीजेपी
को हमला करना
ही था। बीजेपी
नेता मुख्तार अब्बास
नकवी ने राहुल
के भावनात्मक भाषण
को इमोशनल अत्याचार
करार दिया। जाहिर
है राहुल ने
प्रचार की एक
अलग राह पकड़ी
है। देश में
यूपीए सरकार के
खिलाफ एक माहौल
बना है। जिसका
फायदा देश में
बीजेपी और दिल्ली
में आप जैसी
पार्टियां उठाने की फिराक
में हैं। अब
सवाल है कि
क्या भ्रष्टाचार और
महंगाई जैसे मुद्दों
पर राहुल का
इमोशनल टच भारी
पड़ेगा। आईबीएन7 के खास
कार्यक्रम एजेंडा में इसी
मुद्दे पर चर्चा
में शामिल थे
कांग्रेस नेता रीता
बहुगुणा जोशी, बीजेपी नेता
सुधांशु मित्तल, न्यू इंडियन
एक्सप्रेस के एडिटोरियल
डायरेक्टर प्रभु चावला और
सीएनबीसी आवाज के
संपादक संजय पुगलिया।
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