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Wednesday, April 9, 2014

दूसरों की सलाह से अच्छा है खुद से प्रेरणा लें

एक प्रतिभावान आदमी किसी समस्या का उपयुक्त उपाय तलाश कर उसका निदान करता है। अपने आस-पास नजर डालने पर आप पाएंगे कि कामयाब इंसान भी आप ही की तरह हैं। कभी ऐसा मत सोचिए कि वे आपसे ज्यादा भाग्यशाली हैं। एक बात आप जान लीजिए कि उनकी कामयाबी की सबसे बड़ी वजह यही होगी कि उन्होंने दूसरों की बातों को अनसुना करके स्वयं से प्रेरणा ली और आगे बढ़े।
आश्चर्यजनक रूप से हम किसी नए काम को हाथ में इसलिए नहीं लेते कि हममें वह क्षमता नहीं है, बल्कि हम सोचते हैं कि कभी वह काम पूरा कर ही नहीं पाएंगे। जब तक कोई व्यक्ति किसी कठिन काम में हाथ नहीं लगाता, तब तक उसकी प्रतिभा नहीं मापी जा सकती लेकिन एक बार जब वह अपनी योग्यता को साबित कर देता है तो वह प्रतिभावान बन जाता है।
आपको हर आदमी की सलाह का विश्लेषण करके उसे अपनी परिस्थितियों के मुताबिक ढालना होगा ताकि वह आपके लिए फलदायी साबित हो। चाहे आप कम या ज्यादा आईक्यूवाले होंआंखें मूंदकर किसी की सलाह नहीं मान लेनी चाहिए। आपकी प्रतिभा इसी बात की जांच है कि जो सलाह आपको दी गई है उसे आप कैसे कार्यान्वित करते हैं। आगे दी जा रही इस पौराणिक कथा से आप इसे बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
एक बार एक महात्मा किसी गांव से गुजर रहे थे। उन्होंने देखा कि कुछ लोग रो रहे हैं। पूछने पर पता चला कि सांप के काटने से किसी की मौत हो गई है। महात्मा ने गांव में उस सांप को खोजा और उससे किसी भी आदमी को न काटने की विनती कीताकि गांव वाले सांप से भयभीत न रहें। सांप ने महात्मा से भविष्य में ऐसा न करने का वादा किया।
कुछ दिनों के बाद महात्मा फिर उस गांव से गुजर रहे थे। परिस्थिति बिल्कुल विपरीत थी। गांव वाले उस सांप को पत्थरों व डंडों से पीट रहे थे। सांप मरणासन्न हो चुका था। किसी तरह से महात्मा ने सांप को बचाया। महात्मा ने उस सांप के जख्मों पर दवा लगाते हुए पूछा, “गांव वालों की निर्दयता को तुम क्यों इस तरह सहन कर रहे थे?”
सांप ने जवाब दिया, “मैं आपकी बात मानकर चल रहा था। आपको ऐसा नहीं लगता कि आपकी सलाह मेरी जान ले लेती?”
महात्मा बोले, “मैंने तुम्हें किसी को काटने से मना किया था लेकिन तुमसे यह नहीं कहा था कि जरूरत पड़ने पर तुम अपनी शक्ति का इस्तेमाल करना बंद कर दो।
कई बार ऐसा होता है कि बिना मांगे आपको बहुत से लोग अपनी सलाह दे देते हैं, जबकि आपको उस सलाह की जरूरत नहीं होती। हमारे देश में सलाह ऐसी चीज है जो मुफ्त में मिलती है। आपने टीवी के एक विज्ञापन में देखा होगा कि एक आदमी को सर्दी-जुकाम होने पर उसका दोस्त बोलता है, “तुम क्या कर रहे हो.. वाला सीरप ले लो। (वह किसी खास ब्रांड की दवा का नाम बताता है।)
उसे अपने दोस्त डॉक्टर के पास जाने की सलाह देनी चाहिए थी। क्या किसी को भी इस तरह की सलाह देना उचित है?
आप महसूस करते होंगे कि कम आईक्यू वाले आदमी को ज्यादा आईक्यू वाले आदमी के  मुकाबले समस्याओं को सुलझाने में काफी दिक्कतें आती हैं। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता। जब आप छोटी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम होते हैं तो आप बड़ी समस्याओं का भी समाधान कर सकते हैं। आपको अपने दिमाग में यह बात बैठा लेनी चाहिए कि समस्या को सुलझाने की क्षमता का आईक्यू से कोई सम्बंध नहीं है।
अगर आप छोटी समस्याओं को सुलझा लेते हैं तो इसमें कोई संदेह नहीं कि जिंदगी में बड़ी समस्याओं के आने पर भी आप उनका सामना कर पाएंगे।
आप दुनिया के किसी भी व्यक्ति से कम प्रतिभावान नहीं हैं, अन्यथा आपने पढ़ने के लिए यह लेख नहीं चुना होता और न ही आप अपना कीमती वक्त इसको देते। अगर आप कुछ खो रहे हैं तो वह है आपका दृढ़निश्चय। अपने दृढ़निश्चय को बढ़ाने की कोशिश कीजिए, जो सकारात्मक ऊर्जा पैदा करेगा। कभी भी अपनी योग्यता पर संदेह न करेंआप जीतने के लिए आए हैं और निश्चित रूप से विजेता बनेंगे।
अंत में मैं अपने सभी देशवासियों से यही निवेदन करूँगा कि स्वयं को किसी की बातों में ना आने दें और अपनी बुद्धि पर विश्वास करते हुए इस बार के चुनावों में स्वयं निर्णय लीजिये किसी की सलाह नहीं l
जय हिन्दl 

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